50% वेज नियम अब आपके पेरोल में है: टेक-होम घटाए बिना CTC कैसे बदलें
लेबर कोड लागू हैं और सेंट्रल रूल्स नोटिफ़ाई हो चुके हैं। अगर आपके अलाउंस कुल पारिश्रमिक के आधे से ज़्यादा हैं, तो ज़्यादा वाला हिस्सा अब ग्रेच्युटी और ESI के लिए वेज गिना जाता है, और व्यवहार में PF के लिए भी। प्रोविज़ो क्या कहता है, एक उदाहरण, और टेक-होम में अचानक गिरावट के बिना स्ट्रक्चर कैसे बदलें, यहाँ बताया है।
- किस पर असर
- ऐसे एम्प्लॉयर जिनके CTC स्ट्रक्चर में बेसिक और DA कुल पारिश्रमिक के 50% से कम है, और उन्हें चलाने वाली पेरोल टीमें।
- क्या करें
- हर कर्मचारी के स्ट्रक्चर को वेज की नई परिभाषा पर जाँचें, PF, ग्रेच्युटी और ESI में होने वाले बदलाव का हिसाब लगाएँ, और कर्मचारी की सहमति और अपडेट किए गए अपॉइंटमेंट लेटर या एडेंडम के साथ कंप्लायंट स्ट्रक्चर पर जाएँ।
- आख़िरी तारीख़
- कोई क़ानूनी आख़िरी तारीख़ नहीं है: परिभाषा पहले से लागू है, इसलिए व्यावहारिक आख़िरी तारीख़ आपका अगला ECR है (अक्टूबर का वेज, 15 नवंबर तक)
- चूकने पर जुर्माना
- कम जमा किए गए PF योगदान पर EPF Act के तहत डैमेज और ब्याज लगता है; कम जोड़ी गई ग्रेच्युटी नौकरी छोड़ते समय देनदारी बन जाती है; जो वेज रिकॉर्ड नई परिभाषा से मेल नहीं खाते, वे किसी भी इंस्पेक्शन में कमी (finding) के रूप में दर्ज होते हैं।
- आधिकारिक स्रोत
- Government makes the four Labour Codes effective from 21 November 2025
50% वेज रूल से मेरे पेरोल पर क्या असर पड़ता है?
Codes के तहत, अगर वेज से बाहर रखे गए अलाउंस कुल पारिश्रमिक के आधे से ज़्यादा हो जाते हैं, तो उससे ज़्यादा वाला हिस्सा वापस जोड़ा जाता है और वेज माना जाता है। इससे ग्रेच्युटी और ESI का बेस सीधे बढ़ता है, और व्यवहार में PF का भी, उन कर्मचारियों के लिए जिनका बेसिक कम है, और जब तक स्ट्रक्चर दोबारा न बनाया जाए, टेक-होम कम हो सकता है।
- क्या बदला
- चारों लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू हुए और उनके तहत सेंट्रल रूल्स 8 मई 2026 को नोटिफ़ाई हुए। Code on Wages और Code on Social Security में वेज की परिभाषा, 50% वापस जोड़ने वाले नियम समेत, अब ग्रेच्युटी और ESI पर लागू होती है, और PF के लिए वही स्ट्रक्चर तय करती है जो EPFO देखना चाहता है।
- कब से लागू
- 21 नवंबर 2025 (Codes); 8 मई 2026 (सेंट्रल रूल्स)। राज्यों के रूल्स अभी भी एक-एक राज्य करके नोटिफ़ाई हो रहे हैं।
- किस पर असर
- हर वह एम्प्लॉयर जिसके CTC में बेसिक और DA कुल पारिश्रमिक के आधे से कम है, यानी ज़्यादातर वे स्ट्रक्चर जो कम बेसिक और बड़े स्पेशल अलाउंस पर बने हैं।
- आपको क्या करना है
- हर कर्मचारी का वेज नई परिभाषा के हिसाब से दोबारा निकालें, PF, ग्रेच्युटी और ESI पर असर जाँचें, और अगला पेरोल चलाने से पहले लिखित सहमति के साथ CTC का स्ट्रक्चर बदलें।
- आधिकारिक स्रोत
- Government makes the four Labour Codes effective from 21 November 2025
क्या बदला
चारों लेबर कोड 21 नवंबर 2025 से लागू हुए (PIB रिलीज़; Code on Wages के लिए S.O. 5322(E))। उनके तहत सेंट्रल रूल्स 8 मई 2026 को नोटिफ़ाई हुए (Code on Wages (Central) Rules, 2026, G.S.R. 343(E))। राज्यों के रूल्स अभी एक-एक राज्य करके आ रहे हैं; ताज़ा स्थिति स्टेट रूल्स ट्रैकर में है। पेरोल के लिए सबसे अहम परिभाषा पहले से लागू है: Code on Wages में "wages" की परिभाषा, जो Code on Social Security में शब्दशः दोहराई गई है।
पुराना स्ट्रक्चर था छोटा बेसिक, HRA और बड़ा स्पेशल अलाउंस, और PF बेसिक पर कटता था। नई परिभाषा इसे बदल देती है। वेज का मतलब है बेसिक पे, महँगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस। HRA, कन्वेयंस, ओवरटाइम, कमीशन, स्टैच्युटरी बोनस और एम्प्लॉयर का अपना PF योगदान बाहर रखे गए हैं। लेकिन एक प्रोविज़ो (शर्त) है, Code on Wages की धारा 2(y) और Code on Social Security की धारा 2(88) में:
"Provided that, for calculating the wages under this clause, if payments made by the employer to the employee under clauses (a) to (i) exceeds one-half, or such other per cent. as may be notified by the Central Government, of the all remuneration calculated under this clause, the amount which exceeds such one-half, or the per cent. so notified, shall be deemed as remuneration and shall be accordingly added in wages under this clause"
क्लॉज़ (a) से (i) तक बाहर रखे गए मद हैं, स्टैच्युटरी बोनस से लेकर कमीशन तक; ग्रेच्युटी और छँटनी मुआवज़ा (क्लॉज़ (j) और (k)) इस टेस्ट से बाहर रहते हैं।
आसान भाषा में: आप बेसिक को पे का 30% रखकर बाक़ी सब को अलाउंस नहीं कह सकते। जो भी हिस्सा अलाउंस को आधे से ऊपर ले जाता है, वह वेज बेस में खींच लिया जाता है।
अगर बेसिक और DA पहले से CTC का आधा या उससे ज़्यादा है, तो इस अपडेट से कोई मदद नहीं; ऐसे कर्मचारियों के लिए वापस जोड़ने से कुछ नहीं बदलता। इससे PF वेज सीलिंग भी नहीं बढ़ती, इसलिए सीलिंग से ऊपर वाले स्टाफ़ पर PF का असर सीमित रहता है; देखें ₹25,000 सीलिंग वाली पोस्ट। राज्यवार रूल्स की स्थिति लेबर कोड स्टेट रूल्स ट्रैकर पर है।
किस पर असर
हर वह एम्प्लॉयर जिसका CTC कम बेसिक पर बना है: ज़्यादातर छोटे और मझोले कारोबार, ज़्यादातर सिक्योरिटी और मैनपावर कॉन्ट्रैक्टर, और कई IT कंपनियाँ जिन्होंने सालों पहले कोई स्ट्रक्चर कॉपी कर लिया था।
वेज बेस बढ़ने पर तीन चीज़ें बदलती हैं, लेकिन तीनों एक ही क़ानूनी वजह से नहीं:
| मद | बढ़ा हुआ वेज बेस क्या करता है | आज का क़ानूनी आधार |
|---|---|---|
| ग्रेच्युटी | सर्विस के हर साल पर जुड़ने वाली रकम बढ़ती है | Payment of Gratuity Act रद्द हो चुका है; ग्रेच्युटी अब Code की वेज परिभाषा पर चलती है, वापस जोड़ने वाले नियम समेत |
| ESI | बढ़ा हुआ वेज ESI सीलिंग पार कर सकता है, या उसके नीचे रहते हुए योगदान बढ़ा सकता है | ESI Act रद्द हो चुका है; ESI भी Code की उसी परिभाषा पर चलता है |
| PF (कर्मचारी 12%, एम्प्लॉयर 12%) | दोनों योगदान बढ़ते हैं, PF वेज सीलिंग तक | EPF Act 1952 रद्द नहीं हुआ है (S.O. 5319(E) ने इसे छोड़ दिया), इसलिए PF 1952 के Act के तहत "basic wages" पर ही रहता है। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फ़ैसले के बाद से, सभी कर्मचारियों को एक समान दिए जाने वाले अलाउंस पहले से basic wages में गिने जाते हैं, और EPFO यही टेस्ट लागू करता है |
तो ग्रेच्युटी और ESI के लिए वापस जोड़ना क़ानून है। PF के लिए यह वह फ़ॉर्मूला नहीं है जो EPFO इस्तेमाल करता है, लेकिन ज़्यादातर एम्प्लॉयर आख़िर में यहीं पहुँचते हैं: तीनों के लिए एक वेज बेस का बचाव तीन अलग बेस से आसान है, और जो स्ट्रक्चर 50% टेस्ट पास करता है वह 2019 वाला टेस्ट भी पास करता है। नीचे का उदाहरण एक ही बेस लेता है।
कर्मचारी के लिए ज़्यादा PF कटौती का मतलब है कम टेक-होम, जब तक CTC एडजस्ट न किया जाए। यह बात पेस्लिप बदलने से पहले करें, बाद में नहीं।
एक उदाहरण, हिसाब के साथ (सिर्फ़ समझाने के लिए)
मान लीजिए एक कर्मचारी ₹40,000 महीने पर है, पुराने तरीक़े से बने स्ट्रक्चर में। आँकड़े राउंड किए गए हैं और सिर्फ़ समझाने के लिए हैं।
| कंपोनेंट | पुराना स्ट्रक्चर | 50% टेस्ट के बाद |
|---|---|---|
| बेसिक + DA | ₹12,000 | ₹20,000 |
| HRA | ₹6,000 | ₹6,000 |
| स्पेशल अलाउंस | ₹22,000 | ₹14,000 |
| कुल | ₹40,000 | ₹40,000 |
| PF/ग्रेच्युटी के लिए वेज | ₹12,000 | ₹20,000 |
पुराना स्ट्रक्चर: बाहर रखे गए अलाउंस ₹28,000, यानी कुल का 70%। 50% से ऊपर वाला हिस्सा ₹8,000 है, जो वापस जोड़ा जाता है, इसलिए वेज बेस ₹12,000 से बढ़कर ₹20,000 हो जाता है। 12% पर कर्मचारी का PF ₹1,440 से ₹2,400 हो जाता है, इसलिए अगर और कुछ न बदले तो टेक-होम लगभग ₹960 घट जाता है। एम्प्लॉयर का PF और ग्रेच्युटी की रकम भी उसी अनुपात में बढ़ती है। 50% वेज रूल CTC कैलकुलेटर आपके ब्रेक-अप पर यही हिसाब लगाता है।
क्या करें
- जो भी स्ट्रक्चर आप असल में चलाते हैं, सबकी लिस्ट बनाएँ। पिछली पेरोल फ़ाइल से असली ब्रेक-अप, ग्रेड के हिसाब से।
- हर एक पर टेस्ट लगाएँ। बाहर रखे गए कंपोनेंट जोड़ें; अगर वे कुल पारिश्रमिक के आधे से ज़्यादा हैं, तो वापस जोड़ी जाने वाली रकम और नया वेज बेस निकालें।
- बदलाव का हिसाब लगाएँ। नया PF (कर्मचारी और एम्प्लॉयर, सीलिंग का ध्यान रखते हुए), ग्रेच्युटी की नई रकम, और ₹21,000 के आसपास वाले हर व्यक्ति का ESIC कवरेज।
- स्ट्रक्चर बदलने का तरीक़ा चुनें (नीचे देखें) और पेरोल तक पहुँचने से पहले उसे मंज़ूर करवाएँ।
- काग़ज़ी काम पूरा करें। कर्मचारी की सहमति, अपॉइंटमेंट लेटर का एडेंडम, और वेज रजिस्टर में नए कंपोनेंट।
- एग्ज़िट प्रोसेस ठीक करें। Code on Wages की धारा 17(2) के अनुसार हटाए जाने, बर्ख़ास्तगी, छँटनी या इस्तीफ़े पर देय वेज उस घटना के दो वर्किंग दिनों के भीतर देना ज़रूरी है। ज़्यादातर एग्ज़िट SOP आज यह पूरा नहीं कर पाते। महीने का वेज भी अगले महीने की सात तारीख़ से पहले देय है।
स्ट्रक्चर बदलने के तीन तरीक़े, और उनके फ़ायदे-नुकसान
बेसिक बढ़ाएँ, PF का बोझ CTC में उठाएँ। बेसिक बढ़ाएँ और एम्प्लॉयर का अतिरिक्त PF CTC में जोड़ दें ताकि टेक-होम उतना ही रहे। कर्मचारियों के लिए सबसे साफ़, आपके लिए सबसे महँगा।
बेसिक बढ़ाएँ, CTC वही रखें, टेक-होम घटने दें। कंप्लायंट और लागत पर कोई असर नहीं, लेकिन हर कर्मचारी को अगले महीने कम रकम मिलेगी, और उसे यह बताना ज़रूरी है कि पैसा उसी के अपने PF और ग्रेच्युटी में जा रहा है।
बेसिक बढ़ाएँ, अलाउंस दोबारा बाँटें, टेक-होम को कुछ हद तक बचाएँ। बीच का रास्ता: कर्मचारी का थोड़ा नुकसान, आपकी थोड़ी लागत। जिन एम्प्लॉयर्स के साथ मैं काम करता हूँ, उनमें से ज़्यादातर यहीं तय करते हैं।
क्या न करें: बिना सहमति पेस्लिप बदलना, बेसिक को न्यूनतम वेतन से नीचे ले जाना, स्ट्रक्चर बदलाव को पिछली तारीख़ से लागू करना, या वेज रिकॉर्ड के दो सेट रखना।
इससे क्या नहीं बदलता
- अनिवार्य PF पर PF वेज सीलिंग की सीमा अब भी लागू है; यह नियम बेस बढ़ाता है, सीमा नहीं।
- बेसिक और DA पर न्यूनतम वेतन अब भी लागू है; स्ट्रक्चर बदलकर इससे नीचे नहीं जाया जा सकता।
- सैलरी पर इनकम टैक्स PF के लेबल से प्रभावित नहीं होता, सिवाय वहाँ जहाँ HRA जैसी कोई छूट असल किराए की व्यवस्था पर निर्भर करती है।
- ECR फ़ाइल करने की तारीख़ें नहीं बदलतीं। देखें कंप्लायंस कैलेंडर।
आप ख़ुद मुफ़्त में क्या कर सकते हैं
यहाँ सब कुछ मुफ़्त है और सरकार की अपनी सेवाओं पर होता है। NidhiSetu स्वतंत्र है और EPFO, ESIC या श्रम मंत्रालय से जुड़ा नहीं है; उनकी सेवाओं का कोई ख़र्च नहीं है।
- गज़ट में Code on Wages (धारा 2(y) और धारा 17) और सेंट्रल रूल्स पढ़ें और उनकी एक कॉपी अपनी पेरोल फ़ाइलों के साथ रखें।
- EPFO एम्प्लॉयर पोर्टल पर हर कर्मचारी का मौजूदा PF वेज बेस देखें और नए हिसाब से मिलाएँ।
- नया बेसिक तय करने से पहले राज्य के लेबर डिपार्टमेंट की साइट पर हर राज्य और स्किल कैटेगरी के लिए लागू न्यूनतम वेतन पक्का करें।
- जो फ़ाइलिंग तारीख़ें वही रहती हैं, उनके लिए कंप्लायंस कैलेंडर इस्तेमाल करें।
विशेषज्ञ की मदद कब काम की है
- आप एक से ज़्यादा राज्यों में कई ग्रेड चलाते हैं और आपको एक कंप्लायंट स्ट्रक्चर चाहिए।
- कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ़ किसी ऐसे कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए आता है जिसका स्ट्रक्चर आपके हाथ में नहीं, लेकिन जिसकी PF कमी की ज़िम्मेदारी आप पर आती है।
- कोई इंस्पेक्शन या क्लाइंट ऑडिट नई परिभाषा वाले वेज रजिस्टर माँग रहा है।
- आप चाहते हैं कि स्ट्रक्चर बदलाव सहमति के काग़ज़ों और ऐसी पेरोल फ़ाइल के साथ हो जिसे आपका अकाउंटेंट चला सके: मेरा लेबर कोड रेडीनेस और पेरोल कंप्लायंस का काम।
- स्रोत
- पत्र सूचना कार्यालय (PIB) / श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय
- दस्तावेज़
- Government makes the four Labour Codes effective from 21 November 2025
- तारीख़
- 21 नवंबर 2025
अपने पेरोल के आँकड़े चाहिए?
मुश्किल काम परिभाषा पढ़ना नहीं है। मुश्किल है इसे ऐसे असली पेरोल पर लागू करना जिसमें पचास अलग-अलग स्ट्रक्चर हों, पुराने अपॉइंटमेंट लेटर हों, और ऐसे कर्मचारी हों जिन्हें बढ़ी हुई ग्रेच्युटी से पहले टेक-होम में ₹600 की कमी दिखेगी।
मैं हर कर्मचारी का नया वेज बेस निकालता हूँ, PF, ग्रेच्युटी और ESIC में बदलाव दिखाता हूँ, और सहमति के काग़ज़ों के साथ स्ट्रक्चर बदलने का प्लान तैयार करता हूँ। आँकड़ों पर फ़ैसला आपका है; मैं आपको हिसाब लगी फ़ाइल देता हूँ, इस बात का वादा नहीं कि इंस्पेक्टर क्या कहेगा।
WhatsApp meकंसल्टेशन बुक करें — ₹499
मैं कभी भी आपका OTP, UAN पासवर्ड या बैंक लॉगिन नहीं माँगता।
कोई भी काम शुरू करने से पहले फ़ीस, काम का दायरा और समय लिखित में। नतीजे की गारंटी का कोई वादा नहीं।
WhatsApp meकंसल्टेशन बुक करें — ₹499
मैं कभी भी आपका OTP, UAN पासवर्ड या बैंक लॉगिन नहीं माँगता।
नियम बदलने पर WhatsApp पाएँ
जब EPFO या ESIC कुछ ऐसा जारी करता है जिससे आपका काम बदलता है, तो मैं एक WhatsApp भेजता हूँ। कोई मार्केटिंग नहीं।
लोग जो सवाल पूछते हैं
क्या 50% रूल का मतलब है कि बेसिक CTC का 50% होना चाहिए?
इन शब्दों में नहीं। प्रोविज़ो कहता है कि अगर बाहर रखे गए मदों के तहत भुगतान कुल पारिश्रमिक के आधे से ज़्यादा है, तो आधे से ऊपर वाली रकम पारिश्रमिक मानी जाती है और वेज में जोड़ी जाती है। व्यवहार में ज़्यादातर एम्प्लॉयर बेसिक और DA को कुल पे के लगभग आधे तक बढ़ाकर इसे पूरा करते हैं, इसीलिए इसे 50% रूल कहा जाता है।
क्या हर कर्मचारी का PF बढ़ेगा?
नहीं। PF अब भी क़ानूनी सीलिंग तक के वेज पर ही निकाला जाता है, इसलिए जिस कर्मचारी का बेसिक पहले से सीलिंग से ऊपर है, उसके PF में कोई बदलाव नहीं होता। और सख़्ती से देखें तो PF अब भी EPF Act 1952 के तहत चलता है, जिसे Codes ने रद्द नहीं किया है, इसलिए वापस जोड़ने का फ़ॉर्मूला अपने-आप PF पर लागू नहीं होता। व्यवहार में, सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फ़ैसले के बाद EPFO पहले से ही सभी कर्मचारियों को एक समान दिए जाने वाले अलाउंस को basic wages मानता है, और ज़्यादातर एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी और ESI के लिए एक ही वेज बेस चलाते हैं। सबसे ज़्यादा बदलाव उन कर्मचारियों में होता है जिनका बेसिक कम और अलाउंस का हिस्सा बड़ा है।
क्या इस नियम से ग्रेच्युटी बदलती है?
ग्रेच्युटी परिभाषित वेज पर निकाली जाती है, इसलिए वेज बेस बढ़ने का मतलब है सर्विस के हर साल पर ज़्यादा रकम जुड़ना। इसका असर नौकरी छोड़ते समय दिखता है, महीने के पेरोल में नहीं, इसीलिए इसे नज़रअंदाज़ करना आसान है।
क्या मैं बस स्पेशल अलाउंस घटाकर CTC वही रख सकता हूँ?
आप स्ट्रक्चर दोबारा बना सकते हैं, लेकिन कर्मचारी की लिखित सहमति और अपडेट किया गया अपॉइंटमेंट लेटर या एडेंडम ज़रूरी है, और नया बेसिक लागू न्यूनतम वेतन से नीचे नहीं जाना चाहिए। पेस्लिप में चुपचाप बदलाव, यही एक काम है जो मैं नहीं करूँगा।
दो वर्किंग दिन वाला नियम क्या है?
Code on Wages की धारा 17(2): जहाँ किसी कर्मचारी को हटाया या बर्ख़ास्त किया गया हो, उसकी छँटनी हुई हो, उसने इस्तीफ़ा दिया हो, या संस्थान बंद होने से वह बेरोज़गार हुआ हो, वहाँ "the wages payable to him shall be paid within two working days", यानी उसे देय वेज उस घटना के दो वर्किंग दिनों के भीतर दिया जाएगा। इसमें इस्तीफ़ा साफ़ शब्दों में शामिल है। जो एग्ज़िट सेटलमेंट पहले एक महीना लेते थे, उनके लिए अलग प्रोसेस चाहिए, और महीने का वेज भी अब अगले महीने की सात तारीख़ से पहले देय है (धारा 17(1))।
स्रोत और संदर्भ
- आधिकारिक Government makes the four Labour Codes effective from 21 November 2025 — पत्र सूचना कार्यालय (PIB) / श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय · 21 नवंबर 2025
रिलीज़ ID 2192463। लागू करने के नोटिफ़िकेशन: Code on Wages के लिए S.O. 5322(E), Code on Social Security के लिए S.O. 5319(E), दोनों 21 नवंबर 2025 के। - आधिकारिक S.O. 5322(E): commencement of the Code on Wages, 2019 (sections 1 to 41 and others) from 21 November 2025 — श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय (भारत का राजपत्र) · 21 नवंबर 2025
- आधिकारिक S.O. 5319(E): commencement of the Code on Social Security, 2020 from 21 November 2025 — श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय (भारत का राजपत्र) · 21 नवंबर 2025
धारा 164(1) के आइटम 1, 2 और 4 से 9 लागू करता है: ESI Act और Payment of Gratuity Act रद्द हो गए हैं; आइटम 3, यानी EPF Act 1952, रद्द नहीं हुआ। - आधिकारिक Code on Wages (Central) Rules, 2026, G.S.R. 343(E) — श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय (भारत का राजपत्र) · 8 मई 2026
- आधिकारिक The Code on Wages, 2019 (No. 29 of 2019): section 2(y) and section 17 — विधि और न्याय मंत्रालय (भारत का राजपत्र) · 8 अगस्त 2019
- आधिकारिक The Code on Social Security, 2020 (No. 36 of 2020): section 2(88) and section 164 — विधि और न्याय मंत्रालय (ESIC पर उपलब्ध गज़ट कॉपी) · 28 सितंबर 2020
स्रोत 30 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। अगर कोई आधिकारिक पेज बदल गया है या हट गया है, तो आधिकारिक संस्करण ही मान्य है।
स्वतंत्रता और सटीकता: NidhiSetu एक स्वतंत्र प्राइवेट कंसल्टेंसी है। यह EPFO या ESIC नहीं है, और किसी सरकारी संस्था से जुड़ी, उसके द्वारा समर्थित या उसकी प्रतिनिधि नहीं है। EPFO और ESIC की अपनी सेवाएँ मुफ़्त हैं; मेरी फ़ीस जाँच, दस्तावेज़, फ़ॉलो-अप और एस्केलेशन के लिए है, जो किसी भी काम से पहले लिखित में तय होती है। यह लेख सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। नियम और प्रक्रियाएँ आधिकारिक नोटिफ़िकेशन और सिस्टम अपडेट से बदलती हैं, इसलिए ताज़ा स्थिति संबंधित विभाग से ज़रूर जाँचें।
यह भी पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
Labour Code state rules tracker: which states have notified rules under the four Codes
The four Labour Codes are in force since 21 November 2025 and the central rules since 8 May 2026, but each state has to notify its own rules. As of 30 October 2026 six states and UTs have final rules under all four Codes; Punjab has drafts only. This table tracks every state's position, with the source, and is updated in place.
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EPFO के 13 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर ने सितंबर के ECR को 31 अक्टूबर तक का समय दिया था। अक्टूबर के ECR को ऐसा कोई एक्सटेंशन नहीं मिला है: यह 15 नवंबर 2026 तक जमा करना है, और यह पहला पूरा वेज मंथ है जिसका हिसाब ₹25,000 की PF वेज सीलिंग पर होगा। फ़ाइल करने से पहले पेरोल में क्या जाँचें, यहाँ बताया है।
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Four things every ESIC-covered employer should have settled before 20 November 2026: the wage ceiling that did not change, the registration that must now happen on the day of joining, the Aadhaar identification that ESIC now requires, and the cut-off date itself.
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The Employees' Enrolment Campaign 2026 let employers enrol staff who joined between 1 April 2009 and 31 March 2026 and were never put on PF, for a flat ₹100 in damages. It closed on 31 October 2026 and no extension has been announced. Here is what it offered, and what an employer who missed it does now.
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The Employees' Provident Funds Scheme, 2026 replaced the 1952 Scheme on 29 June 2026. Most of the monthly routine is the same. Three things are not: the principal employer's duties for contract labour are spelt out with their own forms and timelines, returns run on a fifteen-day clock, and exempted establishments get a tighter rulebook. Here is what each one changes in practice.
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AMNESTY 2026 is a one-time window for establishments that have been running a PF trust on an income-tax recognition without a formal exemption notification. It regularises the exemption retrospectively, on conditions. It is not for ordinary employers who deposit with EPFO. Here is who it is meant for, what it gives, and what it costs.
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